इस साल कई चीज़ें एक साथ बदलीं, और दिक़्क़त यही है। अकेला बदलाव नज़र आ जाता है। कर क़ानून और श्रम क़ानून में फैले चार बदलाव धीरे-धीरे ही समझ आते हैं — और इंटरनेट पर घूम रहे ज़्यादातर टेम्पलेट इन सबसे पुराने हैं।
यह रहा असल में क्या बदला, और हर बदलाव के पीछे का प्रावधान।
1. नया आयकर अधिनियम
आयकर अधिनियम, 2025 ने 1 अप्रैल 2026 से 1961 के अधिनियम की जगह ले ली, और आयकर नियम, 2026 20 मार्च 2026 को अधिसूचित हुए (G.S.R. 198(E))।
पेरोल के लिहाज़ से यह ज़्यादातर नंबर बदलने की बात है, पर नंबर वही हैं जो लोग बोलते हैं:
- नई व्यवस्था अब धारा 202 है। पहले 115BAC थी।
- छूट (रिबेट) अब धारा 156 है। पहले 87A थी।
- अधिनियम “कर वर्ष” कहता है। “निर्धारण वर्ष” ख़त्म।
दरें नहीं बदलीं। 2026 में पेश बजट ने स्लैब, रिबेट, अधिभार और उपकर, किसी को नहीं छुआ, इसलिए वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 में वही दरें हैं। नई व्यवस्था में रिबेट के बाद ₹12 लाख तक की कुल आय पर कर नहीं बनता, और ₹75,000 के मानक कटौती के बाद वेतनभोगी के लिए ₹12.75 लाख तक।
2. फ़ॉर्म 12BB अब फ़ॉर्म 124 है
साल की शुरुआत में कर्मचारी जो घोषणा देते हैं — किराया, गृह ऋण का ब्याज, 80C, बाक़ी सब — वह अब फ़ॉर्म 124 है, धारा 392(5)(b) के साथ नियम 205 के तहत। फ़ॉर्म 12BB धारा 192 और नियम 26C के तहत था, और ये दोनों पुराने अधिनियम के साथ चले गए।
प्रयोजन वही है, पर एक नया सवाल है: HRA का दावा करने वाले को बताना होगा कि मकान मालिक से उसका क्या रिश्ता है, अगर कोई है।
यह उस बहुत आम व्यवस्था पर सबसे ज़्यादा लागू होता है जिसमें माता-पिता को किराया दिया जाता है। वह क़ानूनी है और क़ानूनी ही रहेगी। जहाँ व्यवस्था सचमुच की है, वहाँ बताने से कुछ नहीं बदलता — सम्पत्ति वाक़ई उनकी है, पैसा वाक़ई कर्मचारी के खाते से जाता है, और वे उसे आय दिखाते हैं। कर्मचारी के लिए इसका क्या मतलब है: फ़ॉर्म 12BB चला गया।
फ़ॉर्म बदलते समय एक बात भीतर भी सुधार लीजिए, जो अक्सर ग़लत बताई जाती है: मकान मालिक का PAN तब चाहिए जब साल में दिया हुआ किराया ₹1,00,000 से ज़्यादा हो। तब नहीं जब HRA दावा उससे ज़्यादा हो, और छूट की रक़म पर तो बिलकुल नहीं।
3. अब आठ शहरों में HRA की 50% सीमा
सूची में पहले चार थे — मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई। नियम 279 और अनुसूची III तालिका क्रम 11 के तहत अब आठ हैं, जिनमें बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद जुड़े हैं।
इन चार में किराये पर रहने वाले कर्मचारी की छूट इस साल ज़्यादा बन सकती है, बिना वेतन या किराये में किसी बदलाव के। बहुत से पेरोल सॉफ़्टवेयर ने यह नहीं पकड़ा है, इसलिए मान लेने के बजाय जाँच लेना बेहतर है — और साल का आख़िरी TDS निकलने से पहले, ताकि कर्मचारी को रिटर्न में दावा न करना पड़े।
वित्त वर्ष 2025-26 में पुराने चार ही लागू हैं, इसलिए किसी भी गणना को पता होना चाहिए कि वह किस साल की है।
4. अंतिम हिसाब दो कार्य दिवसों में
वेतन संहिता, 2019 की धारा 17(2) के अनुसार, जहाँ कर्मचारी को हटाया गया हो, बर्ख़ास्त किया गया हो, छँटनी हुई हो, उसने त्यागपत्र दिया हो, या प्रतिष्ठान बंद होने से वह बेरोज़गार हुआ हो — वहाँ देय वेतन दो कार्य दिवसों के भीतर देना होगा।
यही बात ज़्यादातर नियमावलियों ने नहीं पकड़ी। पुराने वेतन संदाय अधिनियम, 1936 में दूसरे कार्य दिवस की सीमा सिर्फ़ तब थी जब नियोक्ता सेवा समाप्त करे — त्यागपत्र उसमें शामिल नहीं था, और व्यवहार में ज़्यादातर कंपनियाँ अपनी नोटिस-अवधि नीति से चलती थीं। संहिता ने त्यागपत्र को बर्ख़ास्तगी के बराबर रखा है।
दायरा ध्यान रखिए: वेतन। ग्रेच्युटी, भविष्य निधि की निकासी और वार्षिक बोनस की अपनी व्यवस्था और अपनी समय-सीमाएँ हैं।
दो कार्य दिवस नीति की नहीं, प्रक्रिया की समस्या है। जो कंपनियाँ इसे निभाती हैं वे हिसाब नोटिस अवधि के दौरान तैयार कर लेती हैं, अंतिम दिन शुरू नहीं करतीं।
5. हर नियुक्ति पत्र पर सोलह मदें
OSH संहिता की धारा 6(1)(f), और उसके साथ OSH (केंद्रीय) नियम, 2026 का नियम 6, हर कर्मचारी को ऐसा नियुक्ति पत्र देने को कहते हैं जिस पर सोलह निर्धारित मदें हों।
“ऑफ़र लेटर से काम चल जाएगा” नहीं, और वेतन बताने वाला एक अनुच्छेद भी नहीं। सोलह विशिष्ट मदें। इंटरनेट पर मिलने वाले ज़्यादातर टेम्पलेट नियमों से पहले के हैं और उनमें कई मदें नहीं हैं। राज्य के नियम अपना अलग प्रपत्र भी तय कर सकते हैं।
अब क्या कीजिए
- निवेश घोषणा का फ़ॉर्म बदलिए। अब वह फ़ॉर्म 124 है
- HRA का दावा करने वालों के लिए मकान मालिक से रिश्ते वाला सवाल जोड़िए
- वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देखिए कि किराये पर रहने वाला हर कर्मचारी किस शहर-श्रेणी में आता है
- अपनी नोटिस-अवधि और हिसाब की नीति को दो कार्य दिवसों के सामने रखकर पढ़िए
- अपने नियुक्ति पत्र को सोलह मदों से, क्रम सहित, मिलाइए
इनमें कुछ भी कठिन नहीं है। बस सब एक साथ आया, और चलन के टेम्पलेट पीछे रह गए।
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- नियुक्ति पत्रनए लेबर कोड के सभी 16 विवरणों के साथ।
- फ़ुल एंड फ़ाइनल सेटलमेंटअंतिम कार्य दिवस का पूरा हिसाब: देय, वसूली और शुद्ध राशि।
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- HRA कैलकुलेटरआपके HRA में से कितना कर-मुक्त है, जानिए।
यह भी पढ़ें
- आपका नियुक्ति पत्र टेम्पलेट शायद पुराना हैहर कर्मचारी को नियुक्ति पत्र मिलना चाहिए, और उस पर सोलह विशिष्ट मदें होनी चाहिए। इंटरनेट पर मिलने वाला लगभग हर टेम्पलेट इस ज़रूरत से पहले का है।
- ऑफ़र लेटर कैसे लिखेंऑफ़र लेटर नियोक्ता का प्रस्ताव है, और स्वीकार होते ही उसकी शर्तें तय बात बन जाती हैं। इसमें क्या लिखें कि उम्मीदवार ठीक-ठीक जाने कि वह क्या स्वीकार कर रहा है, वेतन के ब्योरे के नमूने के साथ।
- फ़ॉर्मेट को Word या Excel में डाउनलोड करनाPDF तैयार दस्तावेज़ है। कभी शब्द बदलने होते हैं, कोई शर्त जोड़नी होती है, या फ़ाइल अकाउंटेंट को देनी होती है। बाक़ी दो बटन इसीलिए हैं।