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सैलरी स्लिप फ़ॉर्मेट – मुफ़्त ऑनलाइन पे-स्लिप बनाएँ

हर कर्मचारी के लिए साफ़-सुथरी मासिक पे-स्लिप बनाइए। आय और कटौतियाँ भरिए; कुल योग, शुद्ध वेतन और शब्दों में राशि अपने-आप निकल आती है। आपकी कंपनी की जानकारी याद रहती है, इसलिए अगले महीने सिर्फ़ आँकड़े बदलने होंगे।

नियोक्ता (कंपनी)
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आय
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आय 3
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आय 4
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कटौती 1
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कटौती 2
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कटौती 3
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हस्ताक्षर और टिप्पणी
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हस्ताक्षर
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कुल आय
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कुल कटौती
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शुद्ध वेतन
₹0.00

इस्तेमाल कैसे करें

  1. 1अपनी कंपनी का नाम, पता और लोगो एक बार भरें। ये अगली बार के लिए आपके डिवाइस पर सेव रहते हैं।
  2. 2महीना चुनें, फिर कर्मचारी का नाम, पद, PAN, UAN और बैंक खाता भरें।
  3. 3हर आय और हर कटौती भरें। पंक्तियों के नाम बदल सकते हैं, नई जोड़ सकते हैं और जो काम की नहीं हैं उन्हें हटा सकते हैं।
  4. 4प्रीव्यू में शुद्ध वेतन जाँचें और 'PDF डाउनलोड / प्रिंट' दबाएँ।

सैलरी स्लिप में क्या-क्या होता है

आय। मूल वेतन (बेसिक) पैकेज का आधार होता है, और PF तथा ग्रेच्युटी इसी से निकाली जाती है। बाक़ी का बड़ा हिस्सा मकान किराया भत्ता (HRA), कन्वेयंस और स्पेशल अलाउंस से बनता है। ओवरटाइम, इंसेंटिव और बोनस उसी महीने दिखाए जाते हैं जिस महीने दिए जाते हैं।

कटौतियाँ। भविष्य निधि (PF), ESI, प्रोफ़ेशनल टैक्स, स्रोत पर काटा गया आयकर (TDS), लोन या एडवांस की वसूली, और बिना वेतन के दिनों की कटौती।

शुद्ध वेतन यानी कुल आय में से कुल कटौती घटाने पर बची राशि। यही रक़म कर्मचारी के बैंक खाते में पहुँचनी चाहिए।

नई श्रम संहिताएँ और आपका वेतन ढाँचा

चारों श्रम संहिताएँ 21 नवंबर 2025 से लागू हैं। इनमें “वेतन” की परिभाषा के अनुसार, अगर भत्ते और दूसरे बाहर रखे गए हिस्से कर्मचारी के कुल पारिश्रमिक के आधे से ज़्यादा हो जाते हैं, तो PF, ग्रेच्युटी और ऐसे ही लाभों की गणना करते समय अतिरिक्त हिस्सा वेतन में जोड़ दिया जाता है। संहिताएँ आपको वेतन का ढाँचा बदलने के लिए मजबूर नहीं करतीं, लेकिन जिस पैकेज में मूल वेतन छोटा है उसमें अब अंशदान का ख़र्च बढ़ सकता है। अपने अकाउंटेंट से पूछें कि आपके ढाँचे पर इसका क्या असर है।

जिन बातों का ध्यान रखना चाहिए

  • PAN और UAN। बैंक और अगला नियोक्ता सबसे पहले यही देखते हैं।
  • वेतन वाले दिन। जिस स्लिप में कार्य दिवस, वेतन वाले दिन और बिना वेतन के दिन लिखे हों, उसे शायद ही कभी समझाना पड़ता है।
  • भुगतान की तारीख़ और कर्मचारी का बैंक खाता, ताकि स्लिप बैंक स्टेटमेंट से मेल खाए।
  • हर महीने एक स्लिप, एक ही फ़ॉर्मेट में। लोन देने वाले आम तौर पर पिछले तीन या छह महीने की स्लिप एक साथ माँगते हैं।

सिर्फ़ उसी वेतन के लिए जो वाक़ई दिया गया

सैलरी स्लिप आमदनी का सबूत होती है। बैंक, दूतावास और नियोक्ता इस पर भरोसा करते हैं। पे-स्लिप सिर्फ़ उन कर्मचारियों की बनाएँ जो वाक़ई आपके यहाँ काम करते हैं, और उतनी ही राशि की जो आपने वाक़ई दी है। लोन, वीज़ा या नौकरी पाने के लिए झूठी पे-स्लिप बनाना धोखाधड़ी है, और इसके लिए बनाने वाला और इस्तेमाल करने वाला, दोनों ज़िम्मेदार होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या नियोक्ता के लिए सैलरी स्लिप देना ज़रूरी है?

हाँ। वेतन संहिता (Code on Wages) के अनुसार हर नियोक्ता को कर्मचारियों को वेतन पर्ची देनी होती है। क़ानून के अलावा भी, कर्मचारियों को लोन, क्रेडिट कार्ड, वीज़ा, टैक्स रिटर्न और अगली नौकरी के लिए पे-स्लिप चाहिए होती है, इसलिए हर महीने स्लिप देना अच्छी आदत है।

जिन दिनों काम नहीं किया उनकी कटौती (लॉस ऑफ़ पे) कैसे निकालें?

आम तरीक़ा है: महीने का कुल वेतन, महीने के दिनों से भाग देकर, बिना वेतन वाले दिनों से गुणा करें। इसे 'लॉस ऑफ़ पे (2 दिन)' जैसी कटौती के रूप में भरें, और कार्य दिवस, वेतन वाले दिन और बिना वेतन के दिन भी भर दें, ताकि स्लिप अपने-आप में साफ़ रहे।

PF कितना काटना चाहिए?

कर्मचारी का भविष्य निधि अंशदान PF वेतन (मूल वेतन और महँगाई भत्ता) का 12% होता है। जिन संस्थानों में 20 या उससे ज़्यादा कर्मचारी हैं, वहाँ उन कर्मचारियों के लिए PF अनिवार्य है जिनका PF वेतन वेतन-सीमा के भीतर है। यह सीमा कई साल तक ₹15,000 महीना रही; सितंबर 2026 में सरकार ने इसे बढ़ाकर ₹25,000 करने की घोषणा की है। कई नियोक्ता इससे ज़्यादा वेतन पर भी अंशदान करते हैं। अपनी पे-रोल के लिए सही सीमा और आधार अपने अकाउंटेंट से या EPFO की वेबसाइट पर पक्का कर लें।

ESI कब लागू होता है?

ESI उन कर्मचारियों पर लागू होता है जिनका वेतन ₹21,000 महीने तक है और जिनके संस्थान में 10 या उससे ज़्यादा कर्मचारी हैं। कर्मचारी का हिस्सा कुल वेतन का 0.75% और नियोक्ता का 3.25% होता है। कटौती से पहले मौजूदा दरें और सीमाएँ जाँच लें।

प्रोफ़ेशनल टैक्स क्या है?

यह रोज़गार पर लगने वाला एक छोटा-सा कर है जो कुछ राज्य लगाते हैं, जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, गुजरात और तमिलनाडु। यह साल में ₹2,500 से ज़्यादा नहीं हो सकता। राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा समेत कई राज्य इसे नहीं लगाते। अगर आप पर लागू नहीं है तो वह पंक्ति हटा दें।

क्या पे-स्लिप पर हस्ताक्षर या मुहर ज़रूरी है?

कंप्यूटर से बनी पे-स्लिप आम तौर पर बिना हस्ताक्षर के मान ली जाती है, इसीलिए वह पंक्ति पहले से छपती है। अगर कोई बैंक या दूतावास हस्ताक्षर वाली स्लिप माँगे, तो हस्ताक्षर की जगह छापने के लिए वह टिक हटा दें, फिर हस्ताक्षर करके मुहर लगा दें।

क्या पे-स्लिप हिंदी में बन सकती है?

हाँ। प्रीव्यू के ऊपर 'दस्तावेज़ की भाषा' में हिंदी चुनें। शीर्षक और शब्दों में शुद्ध वेतन हिंदी में हो जाएँगे, और पंक्तियों के नाम वैसे ही रहेंगे जैसे आपने लिखे हैं।

पिछली समीक्षा: 18 सितंबर 2026

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