हर जनवरी पेरोल प्रमाण माँगता है, और हर जनवरी उसका एक ढेर वापस आता है। लौटी हुई रसीद कोई औपचारिकता नहीं है — उस महीने की छूट गई।
रसीद पर क्या-क्या होना चाहिए
- मकान मालिक का नाम और पता
- किरायेदार के रूप में आपका नाम
- किराये की सम्पत्ति का पता
- रसीद किस अवधि की है — एक महीना, साफ़ लिखा हुआ
- रक़म, अंकों और शब्दों दोनों में
- तारीख़ और मकान मालिक के हस्ताक्षर
- मकान मालिक का PAN, जहाँ ज़रूरी हो — नीचे देखें
- रेवेन्यू स्टाम्प, जहाँ नक़द भुगतान राज्य की सीमा पार करता हो
रक़म शब्दों में — यही लोग सबसे ज़्यादा छोड़ते हैं। और यही वह चीज़ है जो हस्ताक्षर के बाद अंक बदलने से रोकती है, इसीलिए माँगी जाती है।
PAN वाला नियम, जो लोग उल्टा समझते हैं
मकान मालिक का नाम, पता और PAN तब ज़रूरी है जब साल में आपका दिया हुआ किराया ₹1,00,000 से ज़्यादा हो — यानी लगभग ₹8,333 महीना।
आपके HRA दावे पर नहीं। छूट की रक़म पर नहीं। दिए हुए किराये पर। यह बात लगातार ग़लत बताई जाती है, और सावधानी वाली दिशा में ग़लत होना नुक़सान नहीं करता जबकि दूसरी दिशा में ग़लत होना दावा ले डूबता है। साल का किराया रेखा पार करता है तो PAN चाहिए, भले ही आपकी छूट उससे कहीं कम बनती हो।
मकान मालिक के पास सचमुच PAN न हो तो उनसे इस आशय का हस्ताक्षरित घोषणापत्र लीजिए।
नया सवाल: मकान मालिक से आपका रिश्ता
आयकर नियम, 2026 के तहत नियोक्ता को दी जाने वाली घोषणा अब फ़ॉर्म 124 है — इसने फ़ॉर्म 12BB की जगह ली है। इसमें एक बात नई है: HRA का दावा करते हैं तो बताना होगा कि मकान मालिक से आपका क्या रिश्ता है, अगर कोई है।
माता-पिता को किराया देना
क़ानूनी है, और हमेशा रहा है। यही वह व्यवस्था भी है जो काग़ज़ पर सबसे ज़्यादा दिखती है और हक़ीक़त में सबसे कम — इसीलिए यह नया सवाल आया है।
रिश्ता बताने से कुछ नामंज़ूर नहीं होता। व्यवस्था सचमुच की है तो कुछ नहीं बदलता:
- सम्पत्ति वाक़ई उनके नाम होनी चाहिए, आपके नाम नहीं
- किराया वाक़ई आपके खाते से जाना चाहिए — बैंक ट्रांसफ़र या UPI से, नक़द नहीं
- उन्हें अपने रिटर्न में उसे आय दिखाना होगा
जो व्यवस्था सिर्फ़ रसीद बुक में है, उसे अब पकड़ना आसान है, और उसे कर-नियोजन नहीं, कर-चोरी माना जाता है।
चार वजहें जिनसे रसीदें लौटती हैं
पूरे साल की एक रसीद। पेरोल को महीने अलग-अलग चाहिए। सालभर की एक रसीद दोबारा माँगे जाने का सबसे तेज़ रास्ता है।
मकान मालिक के हस्ताक्षर नहीं। टाइप किया हुआ नाम हस्ताक्षर नहीं होता।
गोल आँकड़े जो बैंक से नहीं मिलते। हर महीने खाते से ₹12,000 जाते हैं तो रसीद पर ₹12,000 ही होना चाहिए — ₹12,500 नहीं, क्योंकि उससे छूट बेहतर बनती थी।
जनवरी में एक ही क़लम से, लगातार नंबरों पर लिखी पूरे साल की रसीदें। वे ठीक वैसी ही दिखती हैं जैसी वे हैं।
पूरे साल की रसीदें एक साथ बनाइए
किराया, महीने और मकान मालिक का विवरण एक बार भरिए, और किराया रसीद फ़ॉर्मेट पूरी अवधि की नंबरवार रसीदें बना देता है, हर एक पर रक़म शब्दों में और हस्ताक्षर तथा स्टाम्प की जगह। छापिए, और जनवरी में एक साथ नहीं — जैसे-जैसे महीने बीतें वैसे-वैसे हस्ताक्षर कराते रहिए।
कुछ भी दाख़िल करने से पहले अपने आँकड़े HRA कैलकुलेटर में डालिए — छूट तीन में से सबसे कम रक़म होती है, और यह जानना काम का है कि आपके मामले में कौन-सी तय कर रही है। पेरोल ने जो मान लिया वह एक अनुमान है।
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- फ़ॉर्म 12BB चला गया। फ़ॉर्म 124 एक बात और पूछता है।नियोक्ता को दी जाने वाली निवेश घोषणा का नंबर भी बदला है और उसमें एक नया सवाल भी जुड़ा है। ज़्यादातर पेरोल टीमों ने नया फ़ॉर्म अभी भेजा ही नहीं है।
- NOC कब चाहिए, और उसमें क्या लिखा जाएNOC एक दस्तावेज़ नहीं, दस्तावेज़ों का परिवार है। और कुछ मामलों में जो चीज़ आप बना रहे हैं वह वह है ही नहीं जो दफ़्तर माँग रहा है।
- अपनी सैलरी स्लिप कैसे पढ़ेंज़्यादातर लोग पे-स्लिप में एक ही आँकड़ा देखते हैं। जो आँकड़ा आपके PF, ग्रेच्युटी और HRA की छूट तय करता है, वह कोई और है।