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सेवाओं के निर्यात का EDF कैसे भरें

तथ्य जाँचे गए: 8 अक्टूबर 2026

1 अक्टूबर 2026 से भारत में सेवाओं का निर्यात करने वाले इसकी घोषणा एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फ़ॉर्म (EDF) पर करते हैं। यह फ़ॉर्म नियमों में तय “निर्दिष्ट प्राधिकारी” (specified authority) को जाता है, जो ज़्यादातर लोगों के लिए वही बैंक है जिसमें विदेश से पैसा आता है। समय-सीमा: जिस महीने इनवॉइस बना, उसके ख़त्म होने से 30 दिन। यानी अक्टूबर 2026 के इनवॉइस का EDF 30 नवंबर 2026 तक। महीने भर के सारे क्लाइंट एक ही EDF में आ सकते हैं।

अपडेट, 8 अक्टूबर 2026: व्यक्ति। 7 अक्टूबर को RBI की मौद्रिक नीति के बाद की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि विदेश को सेवाएँ देकर पैसा पाने वाले व्यक्तियों, जैसे ट्यूशन या छोटा सॉफ़्टवेयर काम करने वालों, को रिपोर्ट करने की ज़रूरत नहीं है, और डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने कहा कि व्यक्तिगत प्रकृति के अनुबंधों के मामले में व्यक्ति रिपोर्टिंग में शामिल नहीं हैं। RBI FAQ जारी करेगा, और विनियमों का पाठ अभी नहीं बदला है। अगर आप व्यक्ति के तौर पर कमाते हैं, तो FAQ का इंतज़ार कीजिए या फ़ॉर्म देने से पहले बैंक से पूछ लीजिए। यह गाइड बाक़ी सब बातों में सेवाओं का निर्यात करने वाली फ़र्मों और कंपनियों पर पूरी तरह लागू है।

EDF क्या है

यह RBI के नए विनियमों, Foreign Exchange Management (Export and Import of Goods and Services) Regulations, 2026 के Annex में दिया गया फ़ॉर्म है। RBI ने ये विनियम 13 जनवरी 2026 को अधिसूचना FEMA 23(R)/2026-RB के रूप में जारी किए थे। ये 1 अक्टूबर 2026 से लागू हैं (विनियम 1(2)) और इन्होंने 2015 के विनियमों की जगह ली है। दो पन्नों का यही फ़ॉर्म अब माल और सेवा, दोनों के लिए है।

ज़िम्मेदारी विनियम 3(2) तय करता है: सेवाओं का निर्यातक सेवाओं के पूरे निर्यात मूल्य की घोषणा EDF में करके निर्दिष्ट प्राधिकारी को देगा, उस महीने के ख़त्म होने से 30 दिन के भीतर जिसमें सेवाओं का इनवॉइस बना।

नियम मसौदे में थे, तब RBI से सेवाओं के निर्यात को EDF से छूट देने को कहा गया था। RBI ने मना कर दिया, क्योंकि FEMA, 1999 की धारा 7 निर्यात की घोषणा को अनिवार्य बनाती है। छूट के बजाय उसने प्रक्रिया और समय-सीमा को लचीला बनाया।

कौन भरे, और फ़ॉर्म कहाँ जाए

नीचे जैसी कमाई आम तौर पर विदेश को दी गई सेवाओं के भुगतान के रूप में आती है:

  • विदेशी क्लाइंट की फ़ीस, चाहे सीधे आए या Upwork, Fiverr जैसे किसी प्लेटफ़ॉर्म से
  • विदेशी क्लाइंट से कंसल्टिंग फ़ीस और एजेंसी का रिटेनर
  • विदेश के ग्राहकों से सॉफ़्टवेयर और SaaS का सब्सक्रिप्शन
  • YouTube, AdSense और ऐसे ही प्लेटफ़ॉर्म से कमाई

किसी फ़र्म या कंपनी के लिए ये सब सेवाओं का निर्यात हैं। व्यक्तियों के लिए ऊपर का अपडेट देखिए: RBI ने कहा है कि विदेश को सेवाएँ देने वाले व्यक्तियों को रिपोर्ट करने की ज़रूरत नहीं है।

फ़ॉर्म कहाँ जाए। विनियम 2(1)(f) के अनुसार सॉफ़्टवेयर के अलावा बाक़ी सेवाओं के लिए निर्दिष्ट प्राधिकारी Authorised Dealer है, यानी आपका बैंक, जिसमें विदेशी भुगतान आता है (बोलचाल में “AD बैंक”)। सॉफ़्टवेयर के लिए Authorised Dealer या Software Technology Parks of India (STPI)। स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) की यूनिट ज़ोन के डेवलपमेंट कमिश्नर के पास EDF देती है।

सेवा या सॉफ़्टवेयर? विनियमों में सॉफ़्टवेयर की परिभाषा बहुत चौड़ी है: कोई भी कंप्यूटर प्रोग्राम, डेटाबेस, ड्रॉइंग, डिज़ाइन, ऑडियो/वीडियो सिग्नल, या किसी भी नाम से कही जाने वाली कोई भी जानकारी, जो किसी भौतिक माध्यम के अलावा किसी और माध्यम में या उस पर हो। आपका काम सॉफ़्टवेयर गिना गया, तो बैंक के साथ STPI का नाम भी है, और भुगतान की तारीख़ तक EDF देने की छूट (नीचे देखें) आपको नहीं मिलती। आपकी कमाई किस श्रेणी में पढ़ी जाए, यह बैंक अपनी आंतरिक नीति से तय करता है, इसलिए पहला EDF भरने से पहले पूछ लीजिए।

समय-सीमा

30 दिन इनवॉइस की तारीख़ से नहीं, उस महीने के ख़त्म होने से गिने जाते हैं जिसमें इनवॉइस बना:

इनवॉइस जिस महीने बने EDF की आख़िरी तारीख़
अक्टूबर 2026 30 नवंबर 2026
नवंबर 2026 30 दिसंबर 2026
दिसंबर 2026 30 जनवरी 2027

विनियम 3(2) की दो शर्तें इसमें ढील देती हैं। सॉफ़्टवेयर के अलावा बाक़ी सेवाओं का निर्यातक EDF भुगतान मिलने की तारीख़ को या उससे पहले भी दे सकता है। और देर हो जाए, तो देरी की वजह बताते हुए बैंक से अनुरोध कीजिए; बैंक को अनुरोध वाजिब लगे, तो वह समय बढ़ा सकता है।

महीने का एक EDF, क्लाइंट चाहे जितने हों

विनियम 3(2)(a) के तहत जिसने एक महीने में एक या ज़्यादा क्लाइंट को सेवाएँ दीं, वह उन सबके लिए एक ही EDF दे सकता है। फ़ॉर्म के भाग 2B में हर इनवॉइस की एक पंक्ति होती है। (इनवॉइस के लिए, हमारा निर्यात इनवॉइस GST का माँगा पृष्ठांकन, देश और मुद्रा छापता है।)

मान लीजिए आप पुणे से फ़्रीलांस काम करते हैं और अक्टूबर 2026 में दो विदेशी क्लाइंट को इनवॉइस भेजते हैं: 6 अक्टूबर को बर्लिन के एक स्टूडियो को €1,200 का, और 21 अक्टूबर को ऑस्टिन की एक कंपनी को US$900 का। दोनों एक ही EDF में भाग 2B की दो पंक्तियाँ बनेंगे, हर एक अपनी मुद्रा में, और यह EDF 30 नवंबर 2026 तक देना है।

YouTube, AdSense और दूसरे प्लेटफ़ॉर्म

अगर आप इनसे व्यक्ति के तौर पर कमाते हैं, तो 7 अक्टूबर को RBI ने जो कहा (ऊपर का अपडेट देखिए), उसके हिसाब से शायद आपको EDF देना ही न पड़े, हालाँकि दोनों अधिकारियों ने YouTube या AdSense का नाम नहीं लिया; FAQ से यह साफ़ होना चाहिए। जो कारोबार EDF देता है, उसके लिए: विनियम 30 दिन उस महीने से गिनता है जिसमें इनवॉइस बना, पर YouTube और AdSense अपने स्टेटमेंट के आधार पर भुगतान करते हैं, आपके इनवॉइस पर नहीं। बैंक इनवॉइस के हवाले के तौर पर क्या मानेगा, और आपकी कमाई सेवा है या सॉफ़्टवेयर (जिसकी परिभाषा में ऑडियो/वीडियो सिग्नल भी आते हैं), ये दोनों बातें बैंक अपनी आंतरिक नीति से तय करता है। पहला EDF भरने से पहले पूछ लीजिए।

फ़ॉर्म भरना, भाग-दर-भाग

फ़ॉर्म अंग्रेज़ी में है, इसलिए नीचे खानों के नाम वैसे ही दिए हैं जैसे फ़ॉर्म पर छपे हैं। आप भाग 1, 2B और 4 भरते हैं। भाग 2A और 3 माल के लिए हैं और भाग 5 बैंक या STPI के लिए; इन्हें ख़ाली छोड़िए।

भाग 1, General Information. इसमें ज़्यादातर आपकी और आपके बैंक की जानकारी जाती है:

  • Type of export में “Goods/Service” लिखा है: आपका Service है। Mode of Transport/Delivery में ऑनलाइन दिए गए काम के लिए “Internet” का खाना है।
  • आपकी जानकारी: नाम, पता और PAN, और IE Code व GSTIN, अगर आपके पास हैं। न हों, तो बैंक से पूछिए कि उन खानों में क्या लिखें।
  • AD Name & Address और AD code: आपके बैंक के। AD code आपकी शाखा बता देगी।
  • Mode of Realisation: L/C (लेटर ऑफ़ क्रेडिट), BG (बैंक गारंटी) या Others, जिसके बारे में फ़ॉर्म पर लिखा है “advance payment, etc. including transfer/remittance to bank a/c maintained overseas”। भुगतान L/C या BG के तहत नहीं आता, तो Others।
  • Third Party: सिर्फ़ तब, जब क्लाइंट के बजाय कोई और भुगतान करे; साथ में उससे आपका रिश्ता।
  • Description of Goods/Services में अपनी सेवाओं का छोटा विवरण, और Total FOB/Services value in words (INR) में कुल मूल्य शब्दों में, रुपये में।
  • Category of Exporter: Custom (DTA units), SEZ, 100% EOU, Warehouse export या others। कोई साफ़-साफ़ न बैठे, तो बैंक से पूछिए। Shipping Bill, Port और Let Export Order (LEO) वाले खाने माल के लिए हैं।

भाग 2B, Details of Export Value of Services. महीने के हर इनवॉइस की एक पंक्ति: क्लाइंट का नाम, पता और देश; इनवॉइस का नंबर, तारीख़, मुद्रा और राशि; Net Realisable value; कॉन्ट्रैक्ट हो तो उसका नंबर और तारीख़; सेवाओं का विवरण; SAC कोड; और Remarks। आपके काम पर कौन-सा SAC कोड लागू होगा, यह पता न हो तो अंदाज़ा मत लगाइए, अपने CA से पूछिए।

भाग 4, घोषणा। इसमें आप घोषणा करते हैं कि ऊपर दी गई जानकारी सही है, और वचन देते हैं कि पूरे मूल्य की विदेशी मुद्रा या रुपये बैंक को “on or before” के आगे लिखी तारीख़ तक सौंप देंगे (फ़ॉर्म ख़ुद कहता है कि यह तारीख़ RBI की तय की हुई वसूली की अवधि के भीतर है), और ज़रूरत पड़ने पर दस्तावेज़ बैंक को देंगे। फ़ॉर्म का नोट कहता है “Strike out whichever is not applicable”: जो विकल्प लागू न हों उन्हें काट दीजिए (“I/We”, “am/are”, “have delivered/will deliver” वग़ैरह), फिर तारीख़ डालकर हस्ताक्षर कीजिए।

EDF फ़ॉर्म वाला पेज आपकी जानकारी से यह सब RBI के Annex के ढाँचे में भर देता है: महीने के इनवॉइस की सूची से भाग 2B, और घोषणा में जो शब्द लागू नहीं, वे कटे हुए। यह PDF या Word फ़ाइल के रूप में डाउनलोड होता है, और हाथ से भरने के लिए ख़ाली EDF PDF में और Word में भी है। दोनों अंग्रेज़ी में हैं, क्योंकि RBI का Annex अंग्रेज़ी में है। EDF कैसे जमा हो (शाखा, नेट बैंकिंग या ईमेल) और साथ में कौन-सा कवरिंग लेटर और दस्तावेज़ लगें, यह हर बैंक ख़ुद तय करता है, इसलिए पहले अपने बैंक से पूछ लीजिए।

पैसा भारत लाने के लिए नौ महीने

विनियम 5(1)(a) के तहत सेवाओं का पूरा निर्यात मूल्य इनवॉइस की तारीख़ से नौ महीने के भीतर प्राप्त करके भारत लाना होता है; निर्यात का इनवॉइस या भुगतान भारतीय रुपये में हो, तो बारह महीने। जनवरी में जारी विनियमों में पंद्रह महीने लिखा था। 22 सितंबर 2026 की संशोधन अधिसूचना FEMA 23(R)/(1)/2026-RB ने, जो 24 सितंबर को राजपत्र में छपी, नियम लागू होने से पहले ही इसे नौ महीने कर दिया।

ऊपर के उदाहरण में बर्लिन वाले इनवॉइस के लिए 6 जुलाई 2027 तक का समय है, और ऑस्टिन वाले के लिए 21 जुलाई 2027 तक। कोई क्लाइंट भुगतान में देर कर रहा हो, तो नौ महीने पूरे होने से पहले ही बैंक से बात कीजिए: विनियम 5(1) के तहत आपके अनुरोध पर, वजह से संतुष्ट होने पर, बैंक यह अवधि बढ़ा सकता है।

₹10 लाख तक के इनवॉइस: एक घोषणा से एंट्री बंद

EDF मिलने के पाँच कार्य दिवस के भीतर बैंक उसे EDPMS (Export Data Processing and Monitoring System) में दर्ज करता है (विनियम 18(1)(b))। ₹10 लाख (या उसके बराबर विदेशी मुद्रा) तक के इनवॉइस के लिए विनियम 4(2) आसान रास्ता देता है: बैंक आपकी इस घोषणा के आधार पर एंट्री बंद कर सकता है कि भुगतान मिल गया है, पूरा या किसी और रूप में। यह घोषणा तिमाही में एक बार भी दी जा सकती है, ताकि सारी एंट्री एक साथ बंद हों। आपका हर इनवॉइस ₹10 लाख या उससे कम का है, तो हर तिमाही एक घोषणा सबसे कम झंझट वाला तरीक़ा है।

यह टैक्स का फ़ॉर्म नहीं है

EDF विदेशी मुद्रा क़ानून FEMA के तहत की गई घोषणा है। आयकर और GST इससे अलग हैं और उनके अपने नियम हैं; उनके लिए अपने CA से बात कीजिए।

पहले EDF से पहले बैंक से क्या पूछें

फ़ॉर्म और समय-सीमा RBI ने तय की है। प्रोजेक्ट और सेवा निर्यात के निर्देश (Memorandum of Instructions on Project and Service Exports) बनाए रखने की माँग पर उसने मना कर दिया और लेन-देन सँभालना बैंकों की अपनी आंतरिक नीति पर छोड़ दिया। विनियम 19 के अनुसार इस नीति में हर प्रक्रिया के दस्तावेज़, समय-सीमा और शुल्क लिखे होने चाहिए, और बैंक को इसकी मुख्य बातें अपनी वेबसाइट पर बतानी हैं, इसलिए पहले वहाँ देख लीजिए। शुल्क वाजिब होने चाहिए, और आपकी ओर से हुई किसी नियामक देरी या उल्लंघन के लिए बैंक आप पर शुल्क या जुर्माना नहीं लगा सकता। फिर अपने बैंक से ये पूछिए:

  1. EDF कैसे लेंगे (शाखा, नेट बैंकिंग या ईमेल), और साथ में क्या चाहिए।
  2. आपकी कमाई को सेवा मानेंगे या सॉफ़्टवेयर।
  3. प्लेटफ़ॉर्म अपने स्टेटमेंट पर भुगतान करता है, तो इनवॉइस के हवाले के तौर पर क्या मानेंगे।
  4. रुपये का कुल जोड़ किस विनिमय दर से निकालें, और पैसा आप तक पहुँचने से पहले कटी फ़ीस कैसे दिखाएँ।
  5. पैसा किसी प्लेटफ़ॉर्म या पेमेंट कंपनी के ज़रिए आता है, तो Third Party वाले खाने भरने हैं या नहीं।
  6. ₹10 लाख वाली घोषणा किस फ़ॉर्मेट में चाहिए, हर इनवॉइस पर या तिमाही में।
  7. 1 अक्टूबर 2026 से पहले के जिन इनवॉइस का भुगतान अभी बाक़ी है, उनका क्या करें।

हर EDF की एक कॉपी, उसमें दर्ज इनवॉइस के साथ, सँभालकर रखिए। ख़बर वाला पहलू संक्षेप में यहाँ है: 1 अक्टूबर 2026 से सेवा निर्यात के लिए क्या बदला।

स्रोत

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